Friday, February 28, 2014

हिन्दू क्या करे ?

 पिछले दिनों "विश्व हिन्दू परिषद् " के संस्थापक एवं अग्रणी नेता श्री सिंघल ने एक बयान दिया था , जिसपर खूब बवाल मचा था।
बवाल मचना ही था , क्योंकि बयान हिंदुओं के हित को ध्यान में रखते हुए दिया गया था।
भारत देश में हिन्दू हित कि बात करना बहुत ही खतरनाक और समाज विरोधी बात मानी जाती है।
आप हिन्दू देवी - देवताओं को खूब गाली दीजिये , जी भर कर कोसिये ,मजाल है कोई कुत्ता भी भौंक जाए।
बल्कि  समाज में आप बड़े सम्माननीय और प्रगतिवादी विचारधारा वाले आज कि नयी पीढ़ी के उदारचरित व्यक्ति कहलायेंगे।
चारों तरफ आप कि इज़ज़त होगी , हर सभा में आप को सम्मान से आमंत्रित भी किया जाएगा।
अगर कोई आप के विचारों को पसंद नहीं करता या उनसे घृणा भी करता है तो वो अधिक से अधिक अपने  मन  ही मन में आप को कोस कर रह जाएगा , क्योंकि आज के युग में भारत देश में हिन्दू और हिन्दू धर्म कि वकालत सिर्फ चन्द सिरफिरे ही करते हैं , और सिरफिरों कि बात सुनने कि फुर्सत किसी के पास नहीं।
अभी आज ही हमारा दूध वाला सुबह-सुबह मुझ से पूछ बैठा , " अंकल जी , हमारे अपने भारत देश में हिन्दू कि दुर्दशा का क्या कारण है ? "
सवाल चाहे कितना भी जायज़ क्यों ना हो , लेकिन मेरे लिए जैसे  मेरे  ज़ख्मों पर नमक ही था।
इसलिए मैंने सुबह-सुबह उसे बिना पूरी तरह से जवाब दिए टालना ही बेहतर समझा।
हिन्दू  सनातन काल से उदारवादी रहा है।
लेकिन आज हिन्दू कि जो दुर्दशा है वो उसके उदारवादी होने के कारण कम , समझौता वादी होने के कारण अधिक है।
  " जो सबके साथ होगा , वही  हमारे साथ भी होगा " .
यह सोच हम सब को कमज़ोर बनाये दे रही है।
 देश में  " वोट बैंक  '  कि राजनीति का नंगा खेल चल रहा है।
राजनीतिज्ञ को वोट चाहिए।
वोट बटोरने के लिए राजनीतिज्ञ किसी भी हद तक जा सकते हैं।
हिन्दू हो या मुसलमान , शरीफ आदमी शान्ति से इज़ज़त कि जिंदगी जीना चाहता है।
बदमाश गुंडागर्दी और घटिया हरकतें करके अपनी जिंदगी खुशियों से भरता है।
आज मुस्लिम समाज के सफेदपोश गुंडे सेक्यूलरज़िम के नाम पर खुलेआम मनमानी करते घूम रहे हैं।
एक बात हम  सब के समझने की है ,
धर्म मेरा हो या दुसरे का , इज़ज़त सब कि होनी चाहिए।
ये बात इस देश में सिर्फ और सिर्फ एक ही राजनीतिज्ञ ने समझी है।
गुजरात में आज हिन्दू-मुसलमान दोनों अमन-चैन से अपनी-अपनी ज़िंदगी बड़े सुख और चैन से जी रहे हैं।
हिन्दू हों या मुसलमान दंगे गुंडे--बदमाश ही करते हैं।
 आज गुजरात में किसी बदमाश कि हिम्मत नहीं कि कोई दंगा-फसाद फैला सके।
लेकिन मुसलमान गुजरात में  हिंदुओं के साथ-साथ आज पूरे सुख और चैन से रह रहा है।
क्या ये हालात सारे देश में पैदा करने कि ज़रुरत नहीं है ?
ये हालात वो ही पैदा कर सकता है जो वोट बैंक कि राजनीति कि परवाह किये बिना केवल देश हित में काम करना चाहता हो।
हिंदुओं को एकबार सारे भेदभाव भूल कर अपनी समझौतावादी आदत छोड़कर एक आज़माए हुए राजनीतिज्ञ के हाथ में देश कि बागडोर सौंपनी चाहिए।
वोट उस के हक़ में दो , जो इस देश कि सोचे ,इस देश के बाकी नागरिकों के साथ-साथ हिन्दू कि भी सोचे .
दुर्भाग्य कि बात है कि ऐसे अनुभवी और मंजे हुए महान राजनीतिज्ञ , मोदी जी का भी लोग विरोध कर रहे हैं।
सावधान हो जाओ हिंदुओं।




Sunday, February 16, 2014

मातृ शक्ति कि जय 

आज के हिंदुस्तान टाइम्स में एक खबर छपी है। 

रांची के निकट एक पांच वर्ष कि बालिका के साथ एक 23 वर्षीय  पडोसी युवक ने बलात्कार किया और फिर उसकी चीख -पुकार से डर कर बच्ची को लहूलुहान स्थिति में छोड़कर भाग गया। 
इसी गम्भीर तरह से घायल स्थिति में बच्ची अपने घर पहुंची और सारे कुकर्म के बारे में  रोते-सिसकते हुए अपनी माँ को बताया ,सारे दुष्कर्म कि बात सुनकर माँ तो जैसे गुस्से से पागल ही हो गयी।  माँ ने बच्ची को इलाज के लिए उसके पिता  के हवाले कियाऔर खुद उस पडोसी लड़के कि खोज में निकल पड़ी। 
उस माँ ने अपनी बच्ची के साथ कुकर्म करने वाले नीच लड़के को ढूंढ निकाला और फिर उस  कुकर्मी लड़के को लोहे की छड से मार-मार कर जान से  ही मार डाला और फिर अपने आप को पुलिस के हवाले कर दिया। 
       " उस माँ का कहना था कि मेरे पड़ोस वाले लड़के
         ने मेरी बेटी का बलात्कार किया, इस पर मैंने 
         उसे जान से मार दिया। तो मैंने क्या गलत 
         किया ? "

 अब प्रश्न ये है कि क्या क़ानून अपने हाथ में लेकर उस माँ ने ठीक किया ?
मैं चाहता हूँ कि इस वीर औरत कि कहानी अधिक से अधिक लोग जानें। 
इसे एक और खबर समझ कर दर-किनार ना कर दें। 
आप सब कि राय का मुझे इंतज़ार रहेगा।

Saturday, February 15, 2014

                                                ॐ 
किसको दोष दें ?

पिछले दिनों एक विदेशी लेखक वेन्डी डोनिजेर द्वारा  लिखी एक पुस्तक , " द  हिंदूस : एन आल्टरनेटिव हिस्ट्री " के नाम से पेंगुइन इंडिया ने छापी थी।
पुस्तक में हिंदुओं को और हिन्दू वीरों को बहुत गंदे रूप में प्रस्तुत किया गया था , जिसमें शिवाजी महाराज और रानी लक्ष्मी बाई जैसे व्यक्तित्वों कि भी निंदा कि गई थी। 
इस पुस्तक के बेहूदा विवरणों के कारण हिन्दू समाज में काफी रोष व्याप्त हुआ था। 
यहाँ तक कि एक सजग हिन्दू पाठक आदरणीय   " श्री  दीनानाथ बत्रा  "     ने पेंगुइन इंडिया पर अदालत में हिन्दू धर्म और हिन्दू वीरों के  बारे में अनुचित प्रकरण छापने और हिंदुओं कि भावनाओं को ठेस पहुंचाने के मामले को लेकर मुकदमा दाखिल कर दिया। 

काफी खींच - तान के बाद पेंगुइन इंडिया ने अपनी गलती मानी और उन लोगों ने श्री दिन नाथ बत्रा से अदालत के बाहर समझौता करना बेहतर समझा। 

समझौते के तहत पुस्तक बाज़ार से वापिस ले ली गई और सारी  प्रतियों को नष्ट कर  दिया गया। 

एक तरफ पेंगुइन इंडिया और श्री बत्रा अपने इस शुभ कार्य के लिए प्रशंसा के पात्र हैं वहीं दूसरी तरफ हिंदुओं में ही ऐसे गद्दार मौजूद हैं जो पेंगुइन इंडिया के इस अदालत से बाहर किये गए समझौते को पाठकों के अधिकारों का हनन मान रहे हैं और उन्होंने उलटे पेंगुइन इंडिया पर अदालत में मुकदमा कर दिया है कि उनका ये कार्य पाठकों के अधिकारों के विरुद्ध है। 
विरोध करने वालों में हमेशा कि तरह हिन्दू राष्ट्र विरोधी शक्तियां ही आगे हैं। 

सभी हिंदुओं को एकजुट होकर अरुंधति रॉय और उसके साथियों कि हिन्दू विरोधी नीतियों कि निंदा करनी चाहिए।


Saturday, December 14, 2013

ये नए हंगामे बाज

सभी विद्वान् इस बात पर एकमत हैं कि वामपंथियों का मुख्य लख्य किसी ना किसी मुद्दे को लेकर हंगामा खड़ा किये रखना होता है।
जब वामपंथ इस देश में अपनी जड़ें मज़बूती से नहीं जमा सका तो इन्होने आतंक का सहारा लिया और बंगाल में पसर कर पैठ गया।
बहुत कोशिशों के बावज़ूद भी वामपंथी बंगाल और दक्षिण भारत में केरल के सिवाय कहीं कोई काबिले तारीफ़ असर दिखा नहीं सके।
उत्तर भारत में अपार कोशिशों के बावज़ूद वामपंथी कहीं सफल नहीं हो पाये।
उत्तर भारत वामपंथियों को कभी स्वीकार नहीं कर पाया।  
फिर एक नया रूप सामने आया ,  " नक्सलवाद " के  नाम से।
नक्सलवादी कहते हैं कि वो वहाँ के निवासियों कि लड़ाई लड़ रहे हैं , क्योंकि वो इलाके पिछड़े हुए हैं , वहाँ बिजली नहीं है , पीने का पानी नहीं है , पढ़ाई के लिए विद्यालय नहीं हैं और बीमारों के इलाज के लिए हस्पताल नहीं हैं , आने -जाने के रास्ते दुर्गम हैं।
लेकिन बड़े मजे कि बात ये है कि जब इन इलाकों में सड़क बनाने कि कोशिश होती है ,तब हमारे नक्सली भाई सड़क बनाने वालों को मार-पीट कर भगा देते हैं।
 बिजली पहुंचाने का प्रयत्न होता है तो ये भाई बाकायदा बिजली कि तारों को काट देते हैं , बिजली संयंत्रों को तोड़-फोड़ करके सिस्टम नष्ट कर देते हैं।
स्कूल और हसपताल जहां शुरू करने कि कोशिश होती है , उस जगह को बम से उड़ा देते हैं।
नारा ये है कि  " बुर्जुवा  " ताकतों को काम नहीं करने देंगे।
ये सब बहाने हैं।
तुम कहते हो लोग कष्ट में हैं और तुम उनको कष्टों से मुक्ति दिलाना चाहते हो।
 लेकिन अगर वहाँ का जन-जीवन सुधारने का प्रयत्न किया जाता है तो तुम काम करने वाले को ही ख़त्म करने कि कोशिश करते हो।
बात वही है कि  हंगामा खड़ा किये रखना है।  

( ये लेख अधिक लंबा हो रहा है , अतः इसे दो भागों में पब्लिश करना ठीक रहेगा )

Friday, August 9, 2013

 ये टोपी बाज़

हमारे  नेतागण पिछले कई दशकों से  देश की जनता को कोई ना कोई टोपी पहनाते  ही  आ रहे हैं।  जब भी कोई विपदा या चुनाव सर पर होते हैं तब , हर बार कोई ना कोई  नया बहाना बना कर, ये कांग्रेसी नेता जनता को मूर्ख बनाने में कामयाब होते ही रहे हैं।  इस प्रकार देखा जाए तो जनता को नई से नई टोपी पहनाना नेताओं का पेशा है।

 " टोपी पहनाना ", ये मुहावरा किसी को बेवकूफ बनाने के लिए प्रयोग होता है और अपने समाज में अक्सर हम कुछ  अधिक चंट लोगों को सज्जन आदमियों का बेवकूफ बना कर अपना उल्लू सीधा करते देखते हैं यानी ये चंट लोग समाज के सीधे-साधे लोगों को टोपी पहनाते रहते हैं और अपने मन में अपनी होशिआरि पर खुश होते रहते हैं। 

पिछले कई महीनों से काफी सयाने लोग श्री नरेन्द्र मोदी को टोपी पहनाने की कोशिश में लगे हैं , पर वो भाई है , कि किसी को हाथ ही नहीं धरने देता। 

एक बड़े मज़े की बात ये हो रही है कि अगर कहीं किसी गली का कुत्ता भी श्री नरेन्द्र मोदी पर भौंक दे तो सारा मीडिया चिल्लाने लगता है कि अब कुत्ते भी नरेन्द्र मोदी से तंग हैं और उनके ऊपर भौंकने लगे हैं। 

कुछ इससे मिलतीजुलती घटना आज -तब हुई जब म  प्र के मु  म श्री शिवराज सिंह चौहान के मंच से एक छोटे-मोटे रोल अदा करने वाले एक मुस्लिम सम्प्रदाय के अभिनेता रज़ा मुराद ने ईद के मौके पर श्री शिवराज सिंह द्वारा मुस्लिम टोपी पहनने पर ,उनकी खूब तारीफ़ कर डाली और उनकी आड़ में मोदी जी पर व्यंग करते हुए कहा कि टोपी पहन लेने से धर्म नहीं बदल जाता और शेष मु मंत्रियों को भी इनसे शिक्षा लेनी चाहिए। 

रज़ा मुराद ने यहाँ तक कहा कि भीम राव आंबेडकर जी ने इस देश के संविधान में हर व्यक्ति को अपने तरीके से अपना धर्म निभाते हुए जीने का हक़ दिलाया है , ये बात कहते हुए रज़ा मुराद  अपने मुस्लिम भाइयों को ये  कहना भूल गया कि  जैसे टोपी पहनने से धर्म नहीं बदल जाता , वैसे ही  " वन्दे मातरम् " बोलने से ईमान भी खतरे नहीं पड़ जाता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के नाम पर आप देश के सम्मान से नहीं खेल सकते। 

रज़ा मुराद के बहाने सभी भाई-बहनों को एक बात बताना चाहता हूँ कि गुजरात में इस बार के चुनावों में श्री मोदी की जीत केवल किसी एक जाति ,वर्ग या धर्म के कारण नहीं हुई बल्कि  उन्हें हर वर्ग और हर धर्म  के लोगों का सहयोग प्राप्त हुआ , मज़े की बात ये कि चाहे अहमदाबाद शहर हो या गुजरात का कोई दूसरा मुस्लिम-बहुल क्षेत्र ,सब जगह से कांग्रेस के मुस्लिम प्रत्याशियों को हराकर बी जे पी के हिन्दू  प्रत्याशी भारी मतों से जीते। ये सारे मीडिया  और   अपने को सेकूलर कहलाने वाले सब लोगों के मुंह पर एक करारा तमाचा था। 

सब हैरान थे , ये क्या हो गया ? , कैसे हो गया ?

असलियत ये है कि मोदी जी के मु  मन्त्री बनने से पहले गुजरात में किसी ना किसी वज़ह से दंगे भड़कते ही रहते थे। जान और माल दोनों की बहुत भारी  तादाद में नुक्सान की शंका बनी रहती थी , चाहे हिन्दू हों या मुसलमान दोनों का बहुत नुक्सान होता था। 

जब से मोदी जी आये हैं , २००२ के दंगों के बाद गुजरात में अमन चैन है ,लोग खुश हैं और आराम की जिंदगी गुज़ार रहे हैं। क्या हिन्दू क्या मुसलमान सब का व्यापार फल-फूल रहा है। 

लेकिन इन सब बातों के बावजूद ये बिका हुआ मीडिया और कुछ शरारती तत्व केवल देश की जनता को सिर्फ , " टोपी ही पहनाना " चाहते हैं। 

क्योंकि ये जानते हैं कि अगर श्री मोदी जी प्रधान मंत्री बन गए तो दूसरों को टोपी पहनाना तो दूर ये खुद भी टोपी पहनना भूल जायेंगे।

बस करो यार कब तक टोपी पहनाओगे ?

Monday, June 3, 2013

मोदी जी के मतवालों के नाम   

 ( कृपया थोड़ा समय लगा कर बहुत गंभीरता से इस लेख को पढ़ें और फिर अपने मन में इस पर विचार भी करें )

 पिछले कुछ समय से बहुत सोची - समझी चाल के तहत एक बहुत खतरनाक प्रचार देश में फैलाने का षड्यंत्र  रचा  जा रहा है .

 मेरे कांग्रेसी भाइयों ने अंग्रेजों से एक बहुत कामयाब फार्मूला ग्रहण किया हुआ है .

    " फूट  डालो और राज करो " 
  इसी मन्त्र को ध्यान में रखते हुए मेरे कांग्रेसी भाइयों के कूटनीति शास्त्रियों ने एक बहुत कामयाब लेकिन खतरनाक वादविवाद देश में खडा किया हुआ है . आज सारा मीडिया इसी एक ही वाद-विवाद में उलझा नज़र आ रहा है

.                कौनसा प्रदेश अधिक तरक्की कर रहा है  ?
                  कौन सा मुक्षमंत्री अधिक कुशल एवं कामयाब नेता है  ?
                   कौन अधिक कामयाब प्रधान मंत्री हो सकता है  ?

 और मज़े की बात ये कि तुलना केवल तीन लोगों में ही की जा रही है  .

                   पहला नाम गुजरात के मुक्षमंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी का है .
                    दूसरा  नाम बिहार के मुक्षमंत्री श्री नितीश कुमार का है .
                     और तीसरा  नाम मध्यप्रदेश के मुक्षमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान  का है .

 वैसे  तो इस बात को कोई भी नहीं नकार सकता कि ये तीनों बहुत इमानदार हैं ,  जन-जीवन की समस्याओं को भली - भाँती समझते हैं , इसीलिए  इन तीनों नेताओं ने अपनी सूझ-बूझ और अपनी कार्य कुशलता के दम पर ही अपने-अपने प्रदेशों में चमत्कारिक तरक्की की है , नतीजा  ये  है कि ये  तीनों नेता आज  बहुत अधिक लोकप्रिय हैं . वैसे  आजकल इन तीन नामों के साथ एक और चौथा नाम भी धीरे-धीरे जुड़ता नज़र आ रहा है , छत्तीसगढ़ के मुक्षमंत्री   डाक्टर श्री रमण लाम्बा का नाम .

 चलिए हम भी इन सब के कार्य-कलाप पर थोड़ी नज़र डाल कर ही आगे बढ़ते हैं ,

जहां श्री नितीश कुमार , श्री शिवराज सिंह चौहान और श्री रमण लाम्बा लगातार दो बार  चुनाव जीतकर अपने-अपने प्रदेश के  दो -दो बार  बहुत कामयाब मुक्षमंत्री रह चुके हैं और तीसरी बार मुक्ष्मंत्री बनने के लिए  चुनाव  लड़ने की तैयारी कर रहे हैं वहीं श्री नरेन्द्र मोदी अपने दम पर तीन बार चुनाव जीतकर चौथी बार गुजरात के मुक्षमंत्री बने हैं .
 ( उनका पहला कार्यकाल केवल एक वर्ष और एक महीने का था और उसके बाद दो बार पूर्णकालिक मुक्ष्मंत्री रहने केबाद अब चौथी बार लगातार मुक्षमंत्री बने हैं )

अब जब सब ही कुशल एवं इमानदार नेता हैं तो इन के बीच की जाने वाली नाप-तोल से परेशानी क्यों ?
आखिर ये सब  हमारे देश के भले  के लिए ही तो किया जा रहा होगा ?
 इसमें  षड्यंत्र  कहाँ है ?

 लेकिन अगर गहराई से शान्ति पूर्वक विचार किया जाय तो राजनीती की मामूली सी भी समझ रखने वाला बहुत आसानी से सारा षड्यंत्र समझ जाएगा .

 षड्यंत्र  मुक्ष रूप से मोदी जी के महान व्यक्तित्व के मुकाबले में उनके अपने भाइयों को खडा करने का है .

 श्री नरेन्द्र मोदी के मुक्ष मंत्री बनने से पहले गुजरात में आये दिन हिन्दू-मुसलामानों के बीच साम्प्रदायिक दंगे होते ही रहते थे . कई-कई साल   से मुस्लिम भाइयों ने हिन्दुओं का  धार्मिक त्यौहार रथयात्रा तक नहीं मनाने दिया था . गुजरात में तस्करी , गुंडागर्दी , बिजली  और सड़क की बदहाली और ना जाने कितनी दुर्दशा थी .

 श्री मोदी जी के मुक्षमंत्री बनने के बाद से लेकर अब तक गुजरात में जो हुआ वो किसी चमत्कार से कम नहीं है . गाँव-गाँव में सडकें ,हस्पताल और स्कूलों के अतिरिक्त सभी सरकारी कार्यालयों में सुचारू रूप से बिना किसी अड़चन के जन साधारण के कार्यों का निपटारा एक बहुत बड़ा वरदान है .

जब फूल खिलते हैं तो खुशबू चारों और फैलती है , यही बात श्री मोदी जी के साथ भी हुई . पूरे देश में अकेले श्री मोदी जी ही हैं , जिनके ऊपर चारों ओर से साम्प्रदायिकता के नाम पर  लगातार झूठे  हमले होते रहे हैं  , एक के बाद दूसरा , दुसरे के बाद तीसरा और तीसरे के बाद न जाने कितने झूठे  मुक़दमे श्री मोदी पर डाले गए ,परन्तु बिना इन सब बातों की परवाह किये श्री मोदी , कभी झुके  नहीं , कभी रुके नहीं  और केवल विकास की बात करते हुए बिना मुस्लिम भाइयों को कोई एक्स्ट्रा वायदे करते हुए हमेशा  आगे बढ़ते रहे . गुजरात के जन -जन ने  इन्हें  अपनी सर-आँखों पर बिठाया . और आज श्री मोदी अपने गुणों के ही कारण सारे देश में , उत्तर से दक्षिण तक और पूरब से पश्चिम तक हरदिल अज़ीज़ सर्वाधिक लोकप्रिय नेता हैं .

श्री मोदी जी के अतिरिक्त हमारे बाकी तीनों नेताओं ने इतने अधिक दुष्प्रचारों और विरोधों का सामना नहीं किया . इन सब ने बिना किसी मुकदमेबाजी में उलझे केवल अपने राज्य के विकास का ही कार्य किया , जबकि श्री मोदी जी ने साम्प्रदायिकता के झूठे लांछन से लड़ते हुए बिना कोई   साम्प्रदायिक समझौता  किये अपने प्रदेश का विकास किया .

 उनकी यही अदा सब को भा गई .

नतीजा ये है कि :-

 बहुत से , सरकारी और गैरसरकारी ,देशव्यापी , सर्वे किये जा चुके हैं , किन्तु हर बार निर्विवाद रूप से सर्वाधिक लोकप्रिय  नेता  के रूप में  केवल  और केवल श्री नरेन्द्र मोदी का नाम ही उभर कर आया है .

यही कारण है कि मेरे कांग्रेस के नेता - गणों की रात की नींद और दिन का  चैन हराम हो गया है .

 मोदी जी के कार्यों को तो नकार नहीं सकते , और आज जब चारों ओर से प्रधान मंत्री पद के  उम्मीदवार के रूप में  श्री मोदी के नाम की पुकार मची हुई है ,तब कांग्रेसी भाइयों को एक ही रास्ता नज़र आ रहा है . इसी लिए ये वादविवाद खडा किया जा रहा है , ताकि हमारे  इन नेताओं के बीच फुट पड़े और  हमारे नेताओं के  प्रशंशक कार्यकर्ता  जो सारे के सारे  एन  डी  ए  के ही कार्यकर्ता हैं , अपने-अपने नेताओं की जय बोलते हुए आपस में  ही लड़ मरें और इस बन्दर बाँट में लुटी-पिटी पूरी तरह भ्रष्टाचार की दलदल में डूबी कांग्रेस को फायदा मिल जाय और वो एक बार फिर सत्ता में आ जाए .

 इसीलिए मैं यह कहता हूँ कि समय बहुत समझदारी से चलने का है . 

मोदी जी की शान को  यदि आगे बढ़ाना है तो अपने भाइयों को अपना दुश्मन मत बनने  दो . मोदी जी की जय भी बोलो लेकिन इस बात का भी ध्यान रखो की हमारे भाइयों के दिल को चोट ना पहुंचे . यदि हम यह कर सके तो कांग्रेसी फेल हो जायेंगे और मोदी जी के नेत्रित्व  में  देश में सुराज की स्थापना हो सकेगी , वरना फिर वही भ्रष्टाचार और महँगाई का नंगा नाच . 


       ( आप को यदि मेरे विचार अच्छे लगे हों तो केवल पढ़ कर और लाइक करके मत रह जाइये , पढने के  साथ -साथ अपने  कमेंट्स भी दीजिये और फिर इसे शेयर भी अवश्य कीजिये  .)

 धन्यवाद .